24 जनवरी 2026। पश्चिमी यूपी के बाद अब पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग खुलकर सामने आई है। अमेठी में आयोजित एब बड़े कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं के मचं से पृथक पुर्वांचल राज्य की जरूरत बताई।
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राज्य विभाजन की बहस तेज हो गई है। पश्चिमी यूपी के बाद अब पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग खुलकर सामने आई है। अमेठी में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं के मंच से पृथक पूर्वांचल राज्य की जरूरत बताई, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना गया है। ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि यूपी के किन 28 जिलों को अलग करने की डिमांड हो रही है और इस राज्य का नाम क्या होगा।
अमेठी से उठा पूर्वांचल राज्य का मुद्दा
21 जनवरी 2026 को अमेठी जिले के ददन सदन में आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ अमीता सिंह ने अलग पूर्वांचल राज्य की मांग दोहराई। वहीं हजारों लोगों की मौजूदगी में दोनों नेताओं ने कहा कि पूर्वांचल का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब इसे अलग राज्य का दर्जा मिले। इस कार्यक्रम में डॉक्टर संजय सिंह ने भी कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है और इतने बड़े राज्य को एक ही प्रशासनिक ढांचे से चलाना मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार सुशासन रोजगार और क्षेत्रीय विकास के लिए राज्य का विभाजन अब जरूरी हो चुका है।
किन 28 जिलों को अलग करने की हो रही डिमांड?
डॉ संजय सिंह ने प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य का पूरा खाका पेश किया है. उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के 8 मंडलों के 28 जिलों को मिला मिलाकर नया राज्य बनाया जाएगा. इनमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, और संत कबीर नगर शामिल है. इन जिलों को मिलाकर नया राज्य बनाने को लेकर नेताओं का दावा है कि करीब 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ यह राज्य देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा।
क्या होगा नए राज्य का नाम?
नए राज्य की मांग के साथ ही राज्य के जिस नाम पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है, वह पूर्वांचल राज्य है. नेताओं का कहना है कि यह नाम क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को दर्शाता है। वहीं फिलहाल किसी वैकल्पिक नाम की ऑफिशियल घोषणा नहीं की गई है, लेकिन आंदोलन का केंद्र बिंदु पूर्वांचल ही बना हुआ है। नए राज्य की मांग के साथ ही डॉक्टर अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ जमीन, बिजली उत्पादन और धार्मिक पर्यटन केंद्रो से भरपूर है, लेकिन इसके बावजूद यह क्षेत्र विकास में पिछड़ा हुआ है। उन्होंने पलायन, बाढ़, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को बड़ी समस्या बताया है और कहा है कि अलग राज्य बनने पर इन मुद्दों का समाधान तेजी से हो सकता है।














