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उत्तर प्रदेश में डिजिटल एमएसएमई इकोसिस्टम को बढ़ावा, ‘उद्यम सारथी’ और नई नीति से निवेश को गति

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Place: लखनऊ                                                 👤By: prativad                                                                Views: 109

19 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को डिजिटल ढांचे से जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य सरकार कारोबारी अनुमतियों, आवेदन प्रक्रियाओं और विभागीय समन्वय को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने पर फोकस कर रही है। इस रणनीति के केंद्र में Udyam Sarathi जैसे प्लेटफॉर्म और नई एमएसएमई नीति को रखा गया है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से इकाइयों की कार्यक्षमता और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत हुई हैं।

ऑनलाइन प्रक्रियाओं से आसान हुआ उद्यम संचालन

प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को लंबे समय से रोजगार और स्थानीय उत्पादन की रीढ़ माना जाता है। अब इसे डिजिटल टूल और नीति आधारित समर्थन के जरिए नई दिशा देने की कोशिश हो रही है। ऑनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग और एकीकृत सेवाओं से उद्यमियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और समय की बचत भी हो रही है, जो छोटे उद्यमों के लिए सीधा लाभ है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए योजनाओं और प्रोत्साहनों की जानकारी समय पर मिल रही है। इससे नए और मौजूदा दोनों तरह के कारोबारी राज्य की औद्योगिक योजनाओं का फायदा उठा पा रहे हैं। प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण निवेश निर्णयों में देरी कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

तकनीकी उन्नयन और एमएसएमई चैंपियनशिप पर जोर

राज्य की रणनीति में तकनीकी उन्नयन और एमएसएमई चैंपियनशिप को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का साधन बनाया गया है। उद्देश्य स्पष्ट है, इकाइयों को गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना। नई मशीनरी, डिजिटल मॉनिटरिंग और प्रक्रिया सुधार से लागत नियंत्रण में मदद मिलती है और आपूर्ति श्रृंखला में उनकी भूमिका मजबूत होती है।

जब छोटे उद्यम आधुनिक तकनीक अपनाते हैं, तब वे बड़े औद्योगिक नेटवर्क से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं। इससे स्थानीय इकाइयों के लिए नए अवसर खुलते हैं और उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ती है।

नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल

राज्य सरकार नई एमएसएमई नीति को प्लग एंड प्ले मॉडल के साथ लागू कर रही है। इस मॉडल के तहत बुनियादी औद्योगिक ढांचा पहले से तैयार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे इकाई स्थापना में समय और जटिलताएं कम होती हैं। जो निवेशक तेजी से उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था खास उपयोगी मानी जा रही है।

नई नीति का मकसद निवेश माहौल को सरल और अनुमानित बनाना है। जमीन, आधारभूत संरचना, डिजिटल अनुमति और प्रक्रियाओं का समन्वित ढांचा एमएसएमई सेक्टर में नई इकाइयों की एंट्री आसान करता है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार संभव हो रहा है।

डिजिटल औद्योगिक केंद्र बनने की दिशा में कदम

Yogi Adityanath सरकार की औद्योगिक रणनीति में एमएसएमई को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना प्रमुख लक्ष्य के रूप में उभरा है। नीति समर्थन और तकनीकी प्लेटफॉर्म के संयुक्त उपयोग के जरिए राज्य खुद को डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रियाओं की सरलता, तकनीकी क्षमता और निवेश सुविधा साथ-साथ बढ़ें तो औद्योगिक विकास स्थिर रहता है। उत्तर प्रदेश में इसी समन्वित मॉडल पर काम हो रहा है। आने वाले समय में इसकी वास्तविक प्रभावशीलता निवेश प्रवाह, इकाइयों की स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धा के आधार पर परखी जाएगी। फिलहाल संकेत यही हैं कि राज्य एमएसएमई क्षेत्र को तकनीक आधारित ढांचे के साथ नई रफ्तार देने में जुटा है।

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