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भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ऊर्जा और पहुंच पर एआई केसबुक जारी

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 124

सतत विकास और सामाजिक समावेशन के लिए एआई के वैश्विक मॉडलों को एक मंच पर लाया गया

17 फरवरी 2026। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ऊर्जा और पहुंच (एक्सेसिबिलिटी) विषय पर केंद्रित एआई इम्पैक्ट केसबुक का औपचारिक विमोचन किया गया। यह प्रकाशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सतत और समावेशी विकास को गति देने वाले वैश्विक अनुभवों और सफल पहलों को एक जगह समेटता है।

यह केसबुक विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, शोध संस्थानों और फाउंडेशनों के सहयोग से तैयार की गई है। इसे नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और नवाचार पारितंत्र के लिए दीर्घकालिक ज्ञान संसाधन के रूप में विकसित किया गया है, ताकि वे अपने-अपने देशों में प्रभावी मॉडल लागू कर सकें।

ऊर्जा क्षेत्र में एआई की दोहरी भूमिका

ऊर्जा सार-संग्रह को International Energy Agency (आईईए) के साथ साझेदारी में तैयार किया गया है। इसमें ऊर्जा परिवर्तन के संदर्भ में एआई की दोहरी भूमिका को रेखांकित किया गया है।

एक ओर, बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतों के चलते बिजली की मांग में इजाफा हो रहा है। दूसरी ओर, एआई ग्रिड ऑप्टिमाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण, डाटा सेंटर दक्षता और उभरते समाधान के माध्यम से ऊर्जा प्रणाली को अधिक कुशल बनाने में मदद कर रहा है। दस्तावेज में ऐसे उदाहरण शामिल हैं जो बढ़ती डिजिटल जरूरतों और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने के रास्ते दिखाते हैं।

एक्सेसिबिलिटी में एआई आधारित हस्तक्षेप

एक्सेसिबिलिटी वॉल्यूम में असिस्टिव डिवाइस, त्वरित डायग्नोसिस, अडैप्टिव लर्निंग, एडवांस्ड प्रोस्थेटिक्स और मेंटल हेल्थ सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित हस्तक्षेपों का उल्लेख है। साथ ही, इसमें डेटा प्राइवेसी, एथिकल डिप्लॉयमेंट और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप नवाचार के महत्व पर भी जोर दिया गया है।

समिट के दौरान एनआईसी के महानिदेशक, एमईआईटीवाई के अपर सचिव और इंडिया एआई के सीईओ श्री अभिषेक सिंह ने कहा कि यह पहल प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई के उपयोग, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और वैश्विक अध्ययन को एकत्र करने की आवश्यकता से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि यह संकलन खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक उपयोगी गाइडबुक साबित हो सकता है, जहां विकास संबंधी चुनौतियां अक्सर समान प्रकृति की होती हैं। उनके अनुसार, यह ज्ञान संसाधन सरकारों और स्टार्टअप्स को प्रभावी समाधानों को दोहराने और विस्तार देने में मदद करेगा।

वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक, ऑफिस ऑफ द चीफ एनर्जी इकोनॉमिस्ट, आईईए के श्री सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि एआई से बढ़ती ऊर्जा मांग पर चर्चा तो होती है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में इसके सकारात्मक प्रभावों को भी उतनी ही गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल एआई के जिम्मेदार और उपयोगी इस्तेमाल को बढ़ावा देगी।

कार्यक्रम में बिजली मंत्रालय के अपर सचिव श्री पीयूष सिंह, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी, ALIMCO के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री प्रवीण कुमार तथा National Green Hydrogen Mission के मिशन निदेशक डॉ. अभय बाकरे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इन केसबुक्स का उद्देश्य देशों के बीच सीख साझा करना, सफल मॉडलों को दोहराने में सहूलियत देना और जलवायु कार्रवाई व सामाजिक समावेशन जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग के लिए साक्ष्य-आधारित ढांचा मजबूत करना है। साफ है, एआई की बहस अब सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं रही, यह सीधे विकास मॉडल से जुड़ चुकी है।

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