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अब डिजिटल होगा ‘Kiss’, दूर बैठे पार्टनर तक पहुंचेगा स्पर्श का एहसास

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 140

21 फरवरी 2026। टेक्नोलॉजी ने दुनिया को जोड़ दिया है, लेकिन दिलों के बीच की दूरी अब भी चुनौती बनी रहती है। इसी खाली जगह को भरने की कोशिश में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने भावनाओं को डिजिटल दुनिया में नया आयाम देने की कोशिश की।

इस प्रयोग का नाम था Kissenger — यानी Kiss Messenger का छोटा रूप। यह एक छोटा गैजेट था, जिसे स्मार्टफोन से जोड़ा जा सकता था। इसमें लगे सॉफ्ट और प्रेशर-सेंसिटिव सेंसर किसी किस की मूवमेंट और उसकी तीव्रता को रिकॉर्ड करते थे।

अगर एक पार्टनर इस डिवाइस को किस करता, तो वही फीलिंग रियल टाइम में दूसरे व्यक्ति के पास मौजूद डिवाइस पर ट्रांसमिट हो जाती। मतलब, सिर्फ आवाज़ या वीडियो नहीं, बल्कि “स्पर्श” का अनुभव भी डिजिटल तरीके से भेजा जा सकता था।

यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं था, बल्कि एक वास्तविक रिसर्च प्रोजेक्ट था। शोधकर्ताओं का मानना था कि इंसानी रिश्तों में टच की भूमिका बेहद अहम होती है। लंबी दूरी के रिश्तों में जहां स्क्रीन ही सहारा होती है, वहां स्पर्श की कमी सबसे ज्यादा महसूस होती है। Kissenger इसी इमोशनल गैप को कम करने की दिशा में एक प्रयोग था।

हालांकि यह डिवाइस कभी बड़े पैमाने पर बाजार में नहीं आया, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया। क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ शब्द और तस्वीरों तक सीमित रहेगी, या वह इंसानी एहसासों की नकल भी कर सकेगी?

वर्चुअल इंटिमेसी, डिजिटल रिश्ते और इमोशनल कनेक्टिविटी पर इस प्रयोग ने वैश्विक चर्चा को जन्म दिया। आज जब एआई और मिक्स्ड रियलिटी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि मशीनें आखिर इंसानी अनुभवों को कितनी बारीकी से दोहरा सकती हैं।

डिजिटल दौर में लोग सिर्फ “मिस यू” सुनना नहीं चाहते। वे उसे महसूस करना चाहते हैं। और शायद इसी चाहत ने टेक्नोलॉजी को एक किस तक पहुंचा दिया।

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