5 जनवरी 2025। वेनेजुएला कोई गरीब देश नहीं है। असल में यह विरोधाभासों का देश है। जनता आर्थिक बदहाली में है, लेकिन ज़मीन के नीचे और विदेशों में फंसी उसकी संपत्ति कई महाशक्तियों की आंखों की किरकिरी बनी हुई है।
वेनेजुएला के पास कितनी संपत्ति है?
आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। अनुमानित मूल्य 10 से 15 ट्रिलियन डॉलर तक बैठता है। यह सऊदी अरब और ईरान से भी ज्यादा है।
इसके अलावा वेनेजुएला के पास
सोने का भंडार
गैस, कोल्टन और अन्य रणनीतिक खनिज
और विदेशों में रखी सरकारी संपत्तियां
सब मिलाकर देखा जाए तो वेनेजुएला की कुल राष्ट्रीय संपत्ति केवल कागजों में नहीं, बल्कि ग्लोबल सिस्टम में बंधक की तरह फंसी हुई है।
अमेरिका ने वेनेजुएला की कौन-कौन सी संपत्ति अपने कब्जे में ली?
सबसे बड़ा मामला है CITGO।
यह वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA की अमेरिकी सब्सिडियरी है। इसकी कीमत लगभग 8 से 10 अरब डॉलर मानी जाती है। अमेरिका ने इसे “अस्थायी वेनेजुएला सरकार” के नाम पर फ्रीज कर दिया।
इसके अलावा
ब्रिटेन में रखा गया लगभग 2 अरब डॉलर का सोना
अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों में जमे अरबों डॉलर
और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर कड़ा प्रतिबंध
कुल मिलाकर वेनेजुएला की 20–30 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति या तो फ्रीज है या कानूनी झगड़ों में फंसी हुई है।
क्या अमेरिका वेनेजुएला की संपत्ति से अपना कर्ज चुका सकता है?
यहां एक कड़वा सच है।
अमेरिका पर इस समय 34 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। वेनेजुएला की पूरी फ्रीज की गई संपत्ति भी अमेरिका के कुल कर्ज का एक प्रतिशत भी नहीं है।
तो साफ है,
यह कर्ज चुकाने का मामला नहीं है।
फिर सवाल उठता है – कब्जा क्यों?
यही असली मुद्दा है।
तेल और ऊर्जा नियंत्रण
वेनेजुएला का तेल भविष्य की ऊर्जा राजनीति का बड़ा हथियार है।
राजनीतिक संदेश
जो अमेरिकी लाइन से बाहर जाएगा, उसकी संपत्ति सुरक्षित नहीं।
चीन और रूस को रोकना
वेनेजुएला चीन और रूस के करीब है। अमेरिका यह रिस्क नहीं लेना चाहता।
रेजीम चेंज की रणनीति
आर्थिक दबाव डालो, सरकार कमजोर करो, फिर मनपसंद सत्ता लाओ।
यह सिर्फ वेनेजुएला नहीं है
ईरान, लीबिया, अफगानिस्तान, रूस—
पैटर्न एक जैसा है।
अमेरिका पहले प्रतिबंध लगाता है, फिर संपत्ति फ्रीज करता है, और अंत में “लोकतंत्र” की भाषा बोलता है।
प्रतिवाद का सवाल
अगर किसी देश की संपत्ति उसकी नहीं रही,
अगर अंतरराष्ट्रीय बैंक राजनीति के औजार बन जाएं,
तो अगली बारी किसकी है?
वेनेजुएला इस समय अकेला नहीं है।
वह सिर्फ एक उदाहरण है।
सवाल सीधा है:
क्या वैश्विक व्यवस्था कानून से चलेगी,
या ताकत से?














