8 जनवरी 2026। रूस में कीड़े इंसानों के भोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह बात संसद की कृषि समिति की उपाध्यक्ष यूलिया ओग्लोब्लिना ने साफ शब्दों में कही है। उनका कहना है कि रूस में कीड़ों का इस्तेमाल केवल जानवरों और मछलियों के चारे तक सीमित रहेगा, न कि लोगों की थाली तक।
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में ओग्लोब्लिना ने कहा, “रूस में हमने कभी कीड़े नहीं खाए और न ही कभी खाएंगे। यह सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों पर किसी भी शोध के बावजूद रूस इस मुद्दे पर अपना रुख नहीं बदलेगा।
ओग्लोब्लिना की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब यूरोपियन यूनियन ने हाल ही में सूखे और पीसे हुए मीलवर्म लार्वा को इंसानों के खाने के लिए मंजूरी दी है। यूरोपीय आयोग के फैसले के तहत ब्रेड, पनीर, पास्ता और जैम जैसे खाद्य पदार्थों में चार प्रतिशत तक कीड़े-आधारित पाउडर मिलाने की अनुमति दी गई है। इसे यूरोप की टिकाऊ प्रोटीन नीति का हिस्सा बताया गया है।
रूसी सांसद ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि पश्चिमी यूरोप में कीड़े-आधारित भोजन की मंजूरी इस बात का संकेत है कि वहां की कृषि व्यवस्था बुरी तरह गिर चुकी है। उनके मुताबिक हालात इतने खराब हैं कि अब लोग कह रहे हैं कि झींगुर, कीड़े और मकड़ियां खानी चाहिए। उन्होंने कहा, “भगवान का शुक्र है कि रूस में ऐसा नहीं है। हमारे पास पर्याप्त जमीन है और हम अपने पारंपरिक रूसी भोजन पर टिके हुए हैं।”
हालांकि रूस में इस विषय पर एक जैसी राय नहीं है। पिछले साल सेंट पीटर्सबर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड फूड टेक्नोलॉजीज़ की प्रमुख ओल्गा पोनोमारेवा ने कहा था कि कीड़े-आधारित प्रोटीन से बने मीठे बार और दही आने वाले तीन से पांच वर्षों में रूसी बाजार में दिख सकते हैं, बशर्ते सांस्कृतिक झिझक दूर की जाए और खाद्य सुरक्षा के प्रभावी मानक तैयार किए जाएं।
गौरतलब है कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में कीड़े लंबे समय से भोजन का हिस्सा रहे हैं। वहीं रूस में 2023 में ब्लैक सोल्जर मक्खियों के प्रजनन को कृषि गतिविधि के तौर पर मंजूरी जरूर दी गई थी, लेकिन सरकार ने साफ किया था कि इससे बने उत्पाद केवल पशु आहार के लिए होंगे, इंसानों के लिए नहीं।














