18 फरवरी 2026। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने दावा किया है कि अमेरिकी फाइनेंसर Jeffrey Epstein से जुड़ी फाइलों में ऐसे आरोप सामने आए हैं, जो “इंसानियत के खिलाफ अपराध” की कानूनी परिभाषा में आ सकते हैं।
United Nations Human Rights Council (UNHRC) ने कहा है कि इस मामले में संभावित रूप से शामिल सभी लोगों पर उनके रसूख या संपत्ति की परवाह किए बिना मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
फाइलों में गंभीर आरोपों का जिक्र
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी लाखों पन्नों के दस्तावेजों की समीक्षा के बाद स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक समूह ने बयान जारी किया। इसमें “यौन दासता, जबरन प्रजनन हिंसा, लोगों को गायब करना, यातना, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार तथा महिला हत्या” जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन कथित अपराधों का पैमाना, स्वरूप और व्यवस्थित तरीका इतना व्यापक है कि इनमें से कई मामलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इंसानियत के खिलाफ अपराध माना जा सकता है।
जवाबदेही की मांग
एपस्टीन की 2019 में जेल में मौत हो गई थी, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने आत्महत्या बताया था। उस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और उन्हें अवैध गतिविधियों के लिए भर्ती करने के गंभीर आरोप थे।
उनकी करीबी सहयोगी Ghislaine Maxwell को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। लेकिन UNHRC का कहना है कि मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर उन वित्तीय ढांचों को लेकर जिनके जरिये कथित अपराधों को अंजाम दिया गया।
UNHRC ने अमेरिका समेत अन्य देशों से अपील की है कि सिर्फ इस्तीफों से बात खत्म नहीं होनी चाहिए। दोषियों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है।
बयान में कहा गया, “कोई भी व्यक्ति इतना शक्तिशाली या धनवान नहीं होना चाहिए कि वह कानून से ऊपर हो।”
वैश्विक स्तर पर असर
करीब 35 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज सामने आने के बाद कई देशों में राजनीतिक और संस्थागत हलचल देखी गई है।
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दिया। वहीं Prince Andrew को अपने शाही खिताब छोड़ने पड़े।
अमेरिका में वॉल स्ट्रीट की एक प्रमुख लॉ फर्म के चेयरमैन और न्यूयॉर्क के एक प्रतिष्ठित आर्ट्स स्कूल के प्रमुख ने पद छोड़ा। यूरोप के कुछ अन्य देशों में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए।
UNHRC ने साफ किया है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या जांच पूरी सच्चाई तक पहुंचेगी और क्या सभी जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।














