नई दिल्ली 17 जुलाई 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ अब केवल नई तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं रह गई है। यह प्रतिस्पर्धा इस बात पर भी केंद्रित हो गई है कि AI का नियंत्रण किसके हाथ में होगा, इसका लाभ किसे मिलेगा और क्या यह तकनीक कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहेगी या पूरी दुनिया के लिए समान रूप से उपलब्ध होगी। इसी दिशा में रूस और चीन ने एक नई पहल करते हुए वैश्विक AI सहयोग का नया मॉडल पेश किया है।
हाल ही में शंघाई में रूस और चीन सहित लगभग 30 देशों ने 'वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन' (World Artificial Intelligence Cooperation Organization) की स्थापना के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अंतर-सरकारी संगठन का उद्देश्य AI के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना, समान अवसर उपलब्ध कराना और यह सुनिश्चित करना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचे।
AI विकास का अलग मॉडल
रूस और चीन का मानना है कि AI का भविष्य तकनीकी एकाधिकार या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से तय नहीं होना चाहिए। दोनों देश ऐसे मॉडल की वकालत कर रहे हैं जिसमें AI सभी देशों और समाजों के लिए सुलभ हो तथा इसका उपयोग आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में किया जाए।
चीन जहां अत्याधुनिक AI अनुसंधान, बड़े भाषा मॉडल (LLM), ओपन-सोर्स तकनीक और उपभोक्ता सेवाओं के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं रूस AI को वास्तविक सेवाओं और सार्वजनिक उपयोग में उतारने पर अधिक जोर दे रहा है। दोनों देशों की रणनीतियां एक-दूसरे की पूरक मानी जा रही हैं।
चीन की ताकत: रिसर्च और ओपन-सोर्स मॉडल
बीते कुछ वर्षों में चीनी कंपनियों ने वैश्विक AI बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उन्नत AI मॉडल पेश किए हैं और कई तकनीकों को ओपन-सोर्स बनाकर दुनिया भर के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सरकारों के लिए उपलब्ध कराया है।
बीजिंग लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि AI का विकास वैश्विक सहयोग के आधार पर होना चाहिए, न कि तकनीकी विभाजन या सीमित कॉर्पोरेट नियंत्रण के तहत।
रूस का फोकस: आम लोगों के लिए उपयोगी AI
रूस ने AI को सीधे नागरिक सेवाओं से जोड़ने की रणनीति अपनाई है। वहां विकसित किए गए प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय प्रणाली, शहरी प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
रूस का AI असिस्टेंट Alice (एलिस) लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रतिदिन इस्तेमाल किया जाता है, जबकि GigaChat रूसी भाषा के उपयोगकर्ताओं को संवाद आधारित खोज और सूचना सेवाएं प्रदान करता है। इन सेवाओं ने AI को आम नागरिकों की दैनिक जिंदगी का हिस्सा बना दिया है।
हेल्थकेयर में AI का व्यापक उपयोग
रूस के मॉस्को हेल्थकेयर सिस्टम में 60 से अधिक AI आधारित डायग्नोस्टिक सेवाएं पहले से कार्यरत हैं। ये सिस्टम मेडिकल इमेजिंग के जरिए विभिन्न बीमारियों की पहचान में डॉक्टरों की सहायता करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इनका उद्देश्य डॉक्टरों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है ताकि रोगों का अधिक सटीक और तेज़ निदान किया जा सके। इसी तरह AI का उपयोग वित्तीय सेवाओं, परिवहन, शिक्षा और सरकारी सेवाओं में भी लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान
रूसी AI कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऐसी तकनीक विकसित कर रही हैं जिन्हें विभिन्न देशों की स्थानीय भाषाओं, कानूनों और आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। यह रणनीति "एक ही मॉडल सभी के लिए" वाली सोच से अलग मानी जा रही है।
वैश्विक सहयोग का नया मंच
नया World Artificial Intelligence Cooperation Organization केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि AI गवर्नेंस के लिए साझा संस्थागत ढांचा तैयार करने की कोशिश है। इसका उद्देश्य नैतिक मानकों को बढ़ावा देना, तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान आसान बनाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विकसित एवं विकासशील देशों के बीच तकनीकी अंतर को कम करना है।
रूस और चीन का कहना है कि AI विकास पर किसी एक देश या कंपनी का नियंत्रण स्थापित करने के बजाय सहयोग आधारित मॉडल भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ साबित होगा।
आगे की रणनीति
रूस आने वाले वर्षों में AI पर कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इनमें इस वर्ष के अंत में आयोजित होने वाली Journey into the World of Artificial Intelligence Conference, Future Technologies Forum और वर्ष 2027 में प्रस्तावित उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन शामिल हैं। इन आयोजनों के माध्यम से विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
बदलता वैश्विक AI परिदृश्य
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, समाज और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गहराई से प्रभावित करेगा। ऐसे समय में रूस और चीन ऐसी व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं जिसमें AI तकनीक केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि अधिक देशों और आम नागरिकों की पहुंच में आए।
हालांकि इस नई पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित संगठन अपने घोषित सिद्धांतों को व्यवहार में कितना प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है। यदि यह प्रयास सफल रहता है, तो भविष्य में यह वैश्विक AI गवर्नेंस की प्रमुख संस्थाओं में शामिल हो सकता है।














