नई दिल्ली 11 अगस्त 2026। भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI का उत्पादन भारत में एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अपने नासिक स्थित प्लांट में भारतीय वायुसेना के लिए 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमान तैयार करेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1.3 अरब डॉलर बताई गई है।
'इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, नए विमानों में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे Su-30MKI के उत्पादन में भारत की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।
पुराने विमानों की भरपाई के लिए बनेंगे नए Su-30MKI
भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल करीब 260 Su-30MKI विमान हैं। नए 12 विमान उन Su-30MKI की भरपाई में मदद करेंगे, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं में नुकसान हुआ है।
HAL का नासिक प्लांट लंबे समय से रूसी डिजाइन वाले लड़ाकू विमानों का लाइसेंस के तहत उत्पादन करता रहा है। इसी संयंत्र में भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) भी तैयार किया जाता है।
Su-30MKI का उत्पादन 2020-21 में उस समय बंद हो गया था, जब रूस के साथ हुए पुराने अनुबंध के तहत विमानों की सभी डिलीवरी पूरी हो गई थीं। अब नए ऑर्डर के साथ इस प्लेटफॉर्म का उत्पादन फिर शुरू किया जाएगा।
'सुपर सुखोई' अपग्रेड से और ताकतवर होगा विमान
नए Su-30MKI में 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री के अलावा वायुसेना के प्रस्तावित 'सुपर सुखोई' अपग्रेड से जुड़े बदलाव भी शामिल किए जाने की योजना है। इन अपग्रेड्स का उद्देश्य विमान की एवियोनिक्स, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और हथियार प्रणालियों को आधुनिक बनाना है।
Su-30MKI को भारत की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। पहला विमान 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था। इसमें भारतीय प्रणालियों और एवियोनिक्स के साथ फ्रांसीसी और इजरायली मूल के कई सब-सिस्टम भी इस्तेमाल किए गए हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल से बढ़ी Su-30MKI की मारक क्षमता
पिछले वर्षों में Su-30MKI के एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को लगातार अपग्रेड किया गया है। विमान को ब्रह्मोस-A एयर-लॉन्च्ड सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस किए जाने के बाद इसकी लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है।
Su-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों में से एक है और इसे एयर सुपीरियरिटी, ग्राउंड अटैक तथा लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
'ऑपरेशन सिंदूर' में भी हुई थी तैनाती
पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान भी Su-30MKI को भारतीय स्ट्राइक फॉर्मेशन को एयर कवर देने के लिए तैनात किया गया था। भारत ने उस सैन्य अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान Su-30MKI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ब्रह्मोस मिसाइलों के साथ स्ट्राइक मिशनों में भी किया गया। इससे एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ कि तीन दशक के करीब पुराने इस प्लेटफॉर्म को लगातार अपग्रेड कर भारतीय वायुसेना की मौजूदा और भविष्य की परिचालन जरूरतों के अनुरूप बनाए रखा जा रहा है।
नए 12 Su-30MKI के निर्माण से न केवल वायुसेना के लड़ाकू विमान बेड़े को मजबूती मिलेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिलेगा।
















