🔴 TRENDING NOW!
भारतीय संस्कृति में सिर्फ पर्यटन नहीं, तीर्थाटन की भावना महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुमार सानू, शंकर महादेवन और जावेद अली ‘सा रे गा मा पा 2026’ के दिवाली स्पेशल एपिसोड में जमाएंगे सुरों की महफिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में हुए शामिल उज्जैन के गौरव की “गिर गाय राधा” ने बनाया रिकार्ड, प्रतिदिन 19 लीटर से अधिक दूध देकर प्रदेश में हासिल किया सर्वाधिक दूध देने वाली गाय का स्थान प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर स्कोडा ऑटो इंडिया ने 350 से अधिक ग्राहक संपर्क केंद्रों का आंकड़ा पार किया, 193 शहरों तक पहुँच का विस्तार किया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश फिल्म के बुंदेली गायक सुनील लोधी के आंखों का उपचार शुरू सीएम डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने लिए अहम फैसले, डेवलपमेंट-इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्वीकार किए 23 हजार 300 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नए उप पुलिस अधीक्षकों को दिए कर्तव्य मंत्र, कहा- रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम करें सॉल्व सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- किसी की सगी नहीं हो सकती कांग्रेस

6 महीने में मोदी हटाने की जल्दी? अमेरिकी ‘सीक्रेट’ और विदेशी दबाव की चर्चा

👤
prativad
👁 1773 व्यूज
📍 भोपाल
6 महीने में मोदी हटाने की जल्दी? अमेरिकी ‘सीक्रेट’ और विदेशी दबाव की चर्चा
28 सितंबर 2025। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ देश और विदेश दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ने की चर्चा हाल ही में सामने आई है। एक वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि मोदी सरकार को हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय शक्तियां और घरेलू विरोधी दल सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

वीडियो के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कुछ संगठन तथा धार्मिक संस्थाएं मोदी की नीतियों से असहज हैं। इसमें कहा गया कि वेटिकन और मिशनरी समूह सरकार की हिंदुत्व-आधारित छवि को अपने लिए चुनौती मानते हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी यह आरोप लगाया गया कि मोदी सरकार घरेलू निवेशकों को प्राथमिकता देकर विदेशी प्रभाव को सीमित कर रही है।

साथ ही, वीडियो में यह दावा किया गया कि प्रधानमंत्री को अमेरिका की किसी बड़ी “गोपनीय योजना” (Secret) का पता चल चुका है, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इसके लिए कोई आधिकारिक प्रमाण पेश किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बातें भारतीय राजनीति में पहले से मौजूद ध्रुवीकरण को और गहरा करती हैं। जहां विपक्ष सरकार पर अल्पसंख्यकों की अनदेखी और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव डालने के आरोप लगाता है, वहीं सरकार खुद को राष्ट्रीय हित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का पैरोकार बताती है।

फिलहाल, यह बहस सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से फैल रही है। इन दावों में कितनी सच्चाई है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Tags :