18 फरवरी 2026। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के सत्र “एक मजबूत भविष्य के लिए सॉवरेन डीप टेक तैयार करना” में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस, क्वांटम कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी के डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में फिनलैंड और भारत के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
सत्र में यह साफ संदेश दिया गया कि रिसर्च, इंजीनियरिंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में फिनलैंड की मजबूत पकड़, भारत के स्केल, तकनीकी प्रतिभा और एप्लिकेशन इकोसिस्टम के साथ मिलकर डीप-टेक समाधानों के सह-नवाचार और वैश्विक स्तर पर तैनाती के लिए ठोस आधार तैयार कर सकती है।
सार्वजनिक-निजी साझेदारी पर फोकस
वक्ताओं ने कहा कि वैज्ञानिक खोज को तेज करना और उसे व्यावसायिक व सामाजिक परिणामों में बदलना तभी संभव है जब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें। ओपन इनोवेशन फ्रेमवर्क, साझा रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और भागीदारी आधारित मॉडल को इस दिशा में अहम बताया गया।
चर्चा में टेक्नोलॉजिकल सॉवरेनिटी को सस्टेनेबल डेवलपमेंट, सर्कुलर इकोनॉमी, क्लाइमेट एक्शन और ह्यूमन-सेंट्रिक डिजाइन से जोड़ा गया। स्पेस टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड कनेक्टिविटी और हाइब्रिड कंप्यूटिंग को लंबी अवधि की मजबूती के लिए जरूरी इनेबलर के रूप में चिन्हित किया गया।
फिनलैंड के प्रधानमंत्री का संदेश
फिनलैंड के प्रधानमंत्री Petteri Orpo ने कहा कि बढ़ती कंप्यूटिंग मांग के दौर में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सुपरकंप्यूटिंग क्षमता तक अकादमिक और उद्योग दोनों की समान पहुंच हो। उन्होंने बताया कि फिनलैंड में एआई रिसर्च और एप्लिकेशन को अगले स्तर तक ले जाने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश साथ आ रहे हैं।
उन्होंने जोर दिया कि मजबूत सार्वजनिक-निजी नीति और सहयोग पर आधारित फिनलैंड की इनोवेशन प्रणाली दशकों से विकसित हुई है। टेक्नोलॉजिकल भविष्य को स्थायी और मजबूत बनाने के लिए पूरी वैल्यू चेन और उसके सामाजिक प्रभाव को समझना जरूरी है। उनके अनुसार, एआई सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे सकता है, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से निपटने में मददगार हो सकता है और समग्र कल्याण को बेहतर बना सकता है।
मानव-केंद्रित नवाचार की जरूरत
फिनलैंड के सांसद Timo Harakka ने कहा कि मजबूत टेक्नोलॉजी की शुरुआत मानव-केंद्रित नवाचार, उच्च कौशल और जिम्मेदार गवर्नेंस से होती है। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड टेक्नोलॉजी को भरोसेमंद, नैतिक और समाज के हित में विकसित करने के साझा दृष्टिकोण से जुड़े हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टेक्नोलॉजिकल सॉवरेनिटी का मतलब अलग-थलग होना नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदारी के साथ आगे बढ़ना है, जिसमें लोग और पर्यावरण दोनों केंद्र में हों।
वैश्विक प्रभाव की दिशा में सहयोग
सत्र में Sitra के प्रेसिडेंट एटे जैस्केलेनेन, ReOrbit के सीईओ सेथु सवेदा सुवनम, Infosys के प्रतिनिधि मंजुनाथ कुक्कुरू, Nokia के पासी टोइवानेन और CSC – IT Center for Science की मारी वॉल्स सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
पूरे सत्र में यह प्रतिबद्धता दिखी कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ओपन, सुरक्षित और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनाए जाएं। लक्ष्य सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं, बल्कि उसे वास्तविक दुनिया में असरदार समाधान में बदलना है, ताकि सॉवरेन और सस्टेनेबल डीप-टेक क्षमताओं के माध्यम से लंबी अवधि की तकनीकी मजबूती हासिल की जा सके।














