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WhatsApp की प्राइवेसी पर सवाल: US में एन्क्रिप्शन दावों की जांच शुरू

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prativad
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📍 भोपाल
WhatsApp की प्राइवेसी पर सवाल: US में एन्क्रिप्शन दावों की जांच शुरू
1 फरवरी 2026। WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अमेरिका में फेडरल अधिकारी उन आरोपों की जांच कर रहे हैं जिनमें दावा किया गया है कि मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. के कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को WhatsApp के एन्क्रिप्टेड मैसेज तक सीधी पहुंच हासिल थी।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, US डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के अंतर्गत आने वाला ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी इस मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच का आधार उन पूर्व मेटा कॉन्ट्रैक्टरों के बयान हैं, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और कंपनी के आंतरिक कर्मचारियों को WhatsApp मैसेज के कंटेंट तक “पूरी पहुंच” दी गई थी।

ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए एक जांच दस्तावेज के अनुसार, एक पूर्व कॉन्ट्रैक्टर ने फेडरल एजेंट को बताया कि फेसबुक की एक टीम के कर्मचारी ने यह स्वीकार किया था कि वे WhatsApp के एन्क्रिप्टेड मैसेज को काफी पीछे तक देख सकते हैं। इसमें आपराधिक मामलों से जुड़ा डेटा भी शामिल बताया गया।

ये आरोप WhatsApp के उस आधिकारिक दावे के ठीक उलट हैं, जिसमें कंपनी कहती है कि यूजर की चैट सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच ही रहती है। WhatsApp की वेबसाइट पर साफ लिखा है कि “चैट के बाहर कोई भी, यहां तक कि WhatsApp भी, यह नहीं देख सकता कि यूजर क्या लिखता, सुनता या शेयर करता है।”

मेटा की ओर से प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि WhatsApp, उसके कर्मचारी या उसके कॉन्ट्रैक्टर किसी भी स्थिति में यूजर्स के एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन तक पहुंच नहीं रख सकते। उन्होंने इन दावों को तकनीकी रूप से असंभव बताया।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस फेडरल जांच को आंतरिक तौर पर “ऑपरेशन सोर्सड एन्क्रिप्शन” नाम दिया गया था। जुलाई 2025 के एक दस्तावेज में इसके शुरू होने का जिक्र मिलता है और रिपोर्ट के मुताबिक यह जनवरी 2026 तक सक्रिय थी। हालांकि, मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसी कई जांचें बिना किसी औपचारिक आरोप के ही बंद कर दी जाती हैं।

यह जांच ऐसे समय में सामने आई है जब मेटा के खिलाफ अमेरिका में एक क्लास-एक्शन मुकदमा भी दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी लगभग सभी WhatsApp कम्युनिकेशन तक पहुंच सकती है और उनका विश्लेषण कर सकती है। इन दावों ने प्राइवेसी को लेकर पहले से मौजूद शंकाओं को और गहरा कर दिया है।

गौरतलब है कि मेटा, जिसके नियंत्रण में फेसबुक और इंस्टाग्राम भी हैं, पहले भी डेटा प्राइवेसी विवादों में फंस चुकी है। 2019 में कंपनी को कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल के बाद अमेरिकी सरकार को 5 अरब डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा था। उस मामले में लाखों फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा राजनीतिक विज्ञापनों के लिए बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया था।

WhatsApp की सुरक्षा को लेकर आलोचना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने हाल ही में WhatsApp के एन्क्रिप्शन दावों पर भरोसा करने वालों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि 2026 में WhatsApp को सुरक्षित मानना गंभीर समझ की कमी दर्शाता है।

वहीं रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव भी पहले कह चुके हैं कि सभी मैसेजिंग ऐप्स खुफिया एजेंसियों के लिए पूरी तरह पारदर्शी सिस्टम हैं और लोगों को संवेदनशील जानकारी शेयर करने से सावधान रहना चाहिए।

WhatsApp यूजर्स के लिए यह जांच सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बुनियादी सवाल खड़ा करती है: क्या डिजिटल दुनिया में “प्राइवेट चैट” अब सिर्फ एक मार्केटिंग लाइन बनकर रह गई है?
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