नई दिल्ली 4 फरवरी 2026। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इसी प्रावधान के अनुसार साइबर अपराध सहित अन्य अपराधों की रोकथाम, पहचान, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर होती है। केंद्र सरकार इन प्रयासों में परामर्श, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करती है।
देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018 में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की रोकथाम, पहचान, जांच और अभियोजन के लिए एक मजबूत ढांचा और इकोसिस्टम तैयार करना था। कम समय में ही I4C ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने और साइबर अपराध से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। 1 जुलाई 2024 से I4C को गृह मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय का दर्जा दिया गया है। यह केंद्र नागरिकों से जुड़े साइबर अपराध मामलों पर केंद्रित है और इसमें एजेंसियों के बीच समन्वय, क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता जैसे पहलू शामिल हैं।
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग और ठगों द्वारा रकम की हेराफेरी रोकने के लिए I4C के तहत वर्ष 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली’ शुरू की गई। 31 दिसंबर 2025 तक इस प्रणाली के जरिए 23.61 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें 8,189 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई जा चुकी है। आम लोगों की सुविधा के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी चालू किया गया है। इसी अवधि में सरकार ने 12.21 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए हैं।
इसके अलावा, 10 सितंबर 2024 को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ शुरू की गई। इसका उद्देश्य साइबर अपराधियों की पहचान को आसान बनाना है। 31 दिसंबर 2025 तक इस रजिस्ट्री में 21.65 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं का डेटा और 26.48 लाख ‘लेयर-1’ म्यूल खातों की जानकारी साझा की गई, जिससे 9,055.27 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन रोके जा सके।
साइबर अपराध डेटा के विश्लेषण और साझा करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक ‘समन्वय प्लेटफॉर्म’ भी विकसित किया गया है। यह मंच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज साइबर अपराध मामलों के अंतर-राज्यीय नेटवर्क का विश्लेषण करता है। इसके ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के जरिए अपराधियों और अपराध अवसंरचना को मानचित्र पर देखा जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म की मदद से अब तक 20,853 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 1,35,074 साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त किए गए हैं।
केंद्र सरकार ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ई-एफआईआर दर्ज करने की पहल भी शुरू की है। दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।














