17 जनवरी 2026। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने खुलासा किया है कि वह पब्लिक इंटरनेट से अहम सैन्य इंटेलिजेंस जुटाने के लिए क्वांटम साइबर वॉरफेयर टूल्स विकसित कर रही है। मकसद साफ है: ओपन-सोर्स डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नज़र रखना और युद्ध से जुड़े विशाल डेटा को बेहद कम समय में प्रोसेस करना।
चीन के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली के मुताबिक, PLA फिलहाल 10 से अधिक क्वांटम आधारित साइबर टूल्स की टेस्टिंग कर रही है। इन टूल्स में भविष्य के युद्धों के लिए मारक क्षमता से ज्यादा रफ्तार और सूचना की बढ़त को अहम माना जा रहा है।
इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी को एक साझा ऑपरेशनल ढांचे में जोड़ने पर काम कर रहे हैं। संकेत साफ हैं कि चीन अब क्वांटम टेक्नोलॉजी को सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उसे सीधे सैन्य योजना और ऑपरेशन में उतारने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
PLA इन सिस्टम्स को अलग-अलग हथियारों के बजाय आपस में जुड़े एक नेटवर्क के तौर पर देख रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इनकी टेस्टिंग चांग्शा स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी की सुपरकंप्यूटिंग लैब में की जा रही है।
इसका मतलब क्या है?
PLA की इंफॉर्मेशन सपोर्ट फोर्स से जुड़े शोधकर्ता लियू वेई ने बताया कि टीम “साइबर सिक्योरिटी से संचालित युद्धक्षेत्र जागरूकता के नए मॉडल” पर काम कर रही है। क्वांटम पोजिशनिंग टेक्नोलॉजी बेहद सटीक नेविगेशन सिस्टम को संभव बना सकती है, जो स्पूफिंग और जैमिंग जैसे हमलों से काफी हद तक सुरक्षित होंगे।
एक साल में इकट्ठा किए गए डेटा के आधार पर एक एकीकृत युद्धक्षेत्र मानचित्र तैयार किया गया है। यह मॉडल सिविलियन क्लाउड-बेस्ड डेटा एग्रीगेशन सिस्टम जैसा है, जिसे अब सैन्य जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है।
साइबर सिक्योरिटी पर दिया गया जोर दिखाता है कि PLA अब सूचना नियंत्रण को पारंपरिक रक्षा जितना ही रणनीतिक मान रही है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली के शब्दों में, टीम “पब्लिक सर्विस प्लेटफॉर्म सिस्टम के एकीकरण और मल्टी-डोमेन सपोर्ट क्षमताओं का पूरी तरह इस्तेमाल” कर रही है।














