×

AI का RAM-इफेक्ट: कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपके गैजेट्स को महंगा बना रहा है

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 202

20 जनवरी 2026। अगर हाल के महीनों में आपने नया PC, लैपटॉप या स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बनाया और बजट गड़बड़ा गया, तो वजह सिर्फ महंगाई नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा फैक्टर है AI और उसका बढ़ता RAM भूख।

RAM यानी रैंडम एक्सेस मेमोरी कंप्यूटर और स्मार्टफोन की शॉर्ट टर्म मेमोरी होती है। यही तय करती है कि आपका सिस्टम कितनी तेजी से काम करेगा। AI मॉडल्स, खासकर जनरेटिव AI, भारी मात्रा में डेटा को एक साथ प्रोसेस करते हैं। इसके लिए उन्हें तेज और बड़ी RAM चाहिए। नतीजा यह कि AI डेटा सेंटर्स RAM और खासतौर पर हाई बैंडविड्थ मेमोरी पर टूट पड़े हैं।

समस्या यहीं खत्म नहीं होती। दुनिया में RAM चिप्स बनाने वाली कंपनियां सिर्फ तीन हैं, Samsung, SK Hynix और Micron। जब इनका फोकस कंज्यूमर RAM से हटकर AI और एंटरप्राइज ग्रेड मेमोरी पर गया, तो आम यूजर्स के लिए सप्लाई सिकुड़ गई। कम सप्लाई और ज्यादा डिमांड का सीधा मतलब है कीमतों में उछाल।

आंकड़े साफ हैं। 2025 की शुरुआत में 32GB RAM किट जहां किफायती मानी जाती थी, वहीं 2026 तक उसकी कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है। इसका असर सीधे PC बिल्डर्स पर पड़ रहा है। एंट्री लेवल सिस्टम भी पहले से काफी महंगे हो गए हैं। स्मार्टफोन और लैपटॉप निर्माता फिलहाल लंबे कॉन्ट्रैक्ट की वजह से कीमतें थामे हुए हैं, लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है।

आगे की तस्वीर भी ज्यादा आसान नहीं है। नई RAM फैक्ट्री लगाना अरबों डॉलर और सालों का खेल है। तुरंत कोई जादुई समाधान नहीं दिखता। हां, अगर AI बूम की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी या बड़े निर्माता अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाते हैं, तो कुछ सालों में हालात सुधर सकते हैं।

फिलहाल सच्चाई यही है। AI भविष्य है, लेकिन उसकी कीमत आज कंज्यूमर चुका रहा है। नया हार्डवेयर खरीदते समय अब सिर्फ फीचर्स नहीं, RAM की कीमत भी सबसे बड़ा फैक्टर बन चुकी है।

Related News

Global News