×

Gmail को पर्सनल AI कमांड सेंटर बनाने की तैयारी में Google, बदल सकता है अरबों लोगों का डिजिटल वर्कफ़्लो

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 133

28 जनवरी 2026। Google अब Gmail को सिर्फ़ ईमेल भेजने और पढ़ने का प्लेटफ़ॉर्म नहीं मान रहा। कंपनी का बड़ा विज़न इसे एक पर्सनल AI एजेंट और कमांड सेंटर में बदलने का है, जो यूज़र की ज़िंदगी को समझे, प्राथमिकताएं पहचाने और ज़रूरी फैसलों में मदद करे। इस दिशा में Gmail के लेटेस्ट AI अपडेट्स क्या संकेत देते हैं, इसे समझने के लिए Gmail के प्रोडक्ट वाइस प्रेसिडेंट ब्लेक बार्न्स से बातचीत की गई।

ब्लेक बार्न्स के मुताबिक, Gmail को एक प्रोएक्टिव असिस्टेंट सिस्टम की तरह दोबारा सोचा जा रहा है। लेकिन साथ ही उन्होंने साफ़ किया कि Google अरबों यूज़र्स के रोज़मर्रा के वर्कफ़्लो में बदलाव को लेकर बेहद सतर्क है। जो आइडियाज़ साझा किए जा रहे हैं, वे अभी भविष्य की सोच हैं, न कि पक्के प्रोडक्ट वादे।

आज की हकीकत यह है कि दुनिया के करीब तीन अरब लोग Gmail इस्तेमाल करते हैं। बहुत से यूज़र्स के लिए Gmail सिर्फ़ इनबॉक्स नहीं, बल्कि उनकी पूरी डिजिटल ज़िंदगी का डैशबोर्ड है। काम से जुड़े मैसेज, ट्रैवल बुकिंग, बिल, फैमिली अपडेट, इनवाइट्स और रिमाइंडर, सब कुछ यहीं से मैनेज होता है। ऐसे में Gmail की भूमिका सिर्फ़ मैसेज कंटेनर की नहीं रह जाती।

हाल ही में लॉन्च हुए Gmail के AI फीचर्स, जैसे ईमेल समरी या रिप्लाई ड्राफ्ट करना, पहली नज़र में सामान्य लग सकते हैं। लेकिन बार्न्स के मुताबिक, ये फीचर्स अपने आप में लक्ष्य नहीं हैं। असली मकसद यह फिर से तय करना है कि एक इनबॉक्स यूज़र के लिए क्या कर सकता है। Google मानता है कि लोग ईमेल का इस्तेमाल अब सिर्फ़ कम्युनिकेशन के लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे हफ़्ते और ज़िंदगी को व्यवस्थित करने के लिए करते हैं।

ब्लेक बार्न्स ने बताया कि टीम का फोकस उन रोज़मर्रा की समस्याओं पर है जिनसे लगभग हर यूज़र जूझता है। बहुत ज़्यादा जानकारी, समय की कमी, लगातार आने वाले मैसेज और छोटे-बड़े कामों की भरमार। ऐसे माहौल में अगर ईमेल काम और पर्सनल लॉजिस्टिक्स का केंद्र है, तो इनबॉक्स को सिर्फ़ एक पैसिव स्ट्रीम नहीं बने रहना चाहिए।

अब तक Gmail के ऑर्गनाइजेशन टूल्स लेबल, कैटेगरी और फ़िल्टर तक सीमित रहे हैं। ये टूल्स फ्लो को मैनेज तो करते हैं, लेकिन कॉन्टेक्स्ट नहीं समझते। समस्या सिर्फ़ ईमेल की संख्या नहीं है, बल्कि यह अस्पष्टता है कि किस मैसेज का आपके लिए असल मायने में महत्व है। एक ही कंपनी से आए ईमेल में कभी ज़रूरी सिस्टम अलर्ट होता है, कभी प्रमोशनल मेल, और कभी कोई ऐसा संदेश जो सच में तुरंत ध्यान मांगता है।

Google का नया AI अप्रोच इसी गैप को भरने की कोशिश है। बार्न्स के अनुसार, कंपनी Gmail को एक ऐसे पर्सनल प्रोएक्टिव इनबॉक्स असिस्टेंट में बदलना चाहती है, जो यह समझने में मदद करे कि इनबॉक्स में सबसे ज़रूरी क्या है, और क्या आपसे छूट गया। इसके लिए AI को सिर्फ़ सॉर्टिंग नहीं, बल्कि इंटरप्रिटेशन करना होगा।

आने वाले समय में यूज़र नेचुरल भाषा में AI को बता सकेंगे कि वे किस तरह के ईमेल या किस क्लस्टर पर फोकस करना चाहते हैं। इसके बाद AI उस ग्रुप की हाई-लेवल समरी देकर बताएगा कि वहां क्या अपडेट हुआ है। इसका मकसद इनबॉक्स को और साफ़ दिखाना नहीं, बल्कि उन फैसलों की संख्या कम करना है जो यूज़र को हर दिन लेने पड़ते हैं।

ब्लेक बार्न्स साफ़ शब्दों में कहते हैं कि भविष्य का Gmail इस सवाल पर केंद्रित होगा कि “इसका मेरे लिए क्या मतलब है?” न कि सिर्फ़ “यह किस फ़ोल्डर में जाएगा?” अगर Google इस विज़न को सही तरीके से लागू कर पाता है, तो Gmail एक ऐसा टूल बन सकता है जो न सिर्फ़ ईमेल मैनेज करे, बल्कि डिजिटल थकान और डिसीजन फ़टीग को भी कम करने में मदद करे।

Related News

Global News