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जैव-ई3 नीति से कम होगा जीवाश्म-आधारित कच्चे माल पर निर्भरता, जैव-विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

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📍 भोपाल
जैव-ई3 नीति से कम होगा जीवाश्म-आधारित कच्चे माल पर निर्भरता, जैव-विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। केंद्र सरकार जैव-ई3 नीति के तहत जीवाश्म-आधारित कच्चे माल के विकल्प के रूप में जैव-आधारित उत्पादों और तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था और चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने जैव-विनिर्माण तकनीकों के विकास और विस्तार के लिए पैमाने, उत्पादन क्षमता और प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर के आधार पर लक्ष्य तय किए हैं। विभाग ऐसी परियोजनाओं को भी वित्तीय और तकनीकी सहायता दे रहा है, जो जीवाश्म-आधारित कच्चे माल के स्थान पर स्वदेशी जैव-आधारित विकल्प विकसित कर रही हैं।

कृषि और औद्योगिक कचरे से ईंधन और रसायन

सरकार कृषि अवशेषों, नगर निकायों से निकलने वाले जैविक कचरे और औद्योगिक जैविक अपशिष्ट को उपयोगी ईंधन, रसायनों और जैव-सामग्रियों में बदलने वाली अनुसंधान, पायलट और प्रदर्शन परियोजनाओं को सहायता दे रही है।

इन परियोजनाओं में बायोमास प्री-ट्रीटमेंट, जैव-उत्प्रेरक, सूक्ष्मजीवी प्रक्रियाओं और एकीकृत जैव-रिफाइनरी जैसी स्वदेशी तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभिन्न प्रकार के बायोमास का बेहतर उपयोग करने और जैव-विनिर्माण की पूरी मूल्य श्रृंखला में स्थिरता लाने का लक्ष्य है।

आयात घटाने में मदद करेगा 'सुजीविका' पोर्टल

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डिजिटल पोर्टल 'सुजीविका' पर जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े आयात के आंकड़े उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ऐसे उत्पादों की पहचान की जा रही है जिन्हें देश में जैव-आधारित विकल्पों के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बढ़ावा देने और आयातित रसायनों, सामग्रियों तथा ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नेट-जीरो लक्ष्य से जोड़ी गई नीति

सरकार ने विशेषज्ञ समितियों, विषयगत समूहों और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के जरिए उन जैव-प्रौद्योगिकी पहलों की पहचान की है, जो भारत के कार्बन उत्सर्जन में कमी और नेट-जीरो लक्ष्यों में योगदान दे सकती हैं।

जैव-ई3 नीति के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय के जरिए जैव-फाउंड्री और जैव-एआई केंद्र जैसे तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही बायोमास आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने, तकनीकों का विस्तार करने और उच्च मूल्य वाले रसायनों, एपीआई, एंजाइम तथा स्मार्ट प्रोटीन के व्यावसायीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्लास्टिक से लेकर विमान ईंधन तक जैव-आधारित विकल्प

नीति के तहत कई पर्यावरण-केंद्रित परियोजनाओं को सहायता दी गई है। इनमें क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों का जैव-पुनर्स्थापन, संरक्षित क्षेत्रों के लिए आणविक तकनीक, एकल-उपयोग प्लास्टिक और पॉलिमर के विकल्प तथा जैविक और औद्योगिक कचरे से टिकाऊ विमानन ईंधन, विशेष रसायन और जैव-सामग्री तैयार करना शामिल है।

इसके अलावा कचरे से मूल्यवर्धन के लिए इंजीनियर्ड एंजाइम और कार्बन कैप्चर एवं उपयोग से जुड़ी एकीकृत जैव-विनिर्माण तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार जैव-ई3 नीति का व्यापक लक्ष्य जैव-आधारित विकल्पों को बढ़ावा देकर जीवाश्म संसाधनों पर निर्भरता कम करना, कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत की प्रगति को तेज करना है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी 13 अगस्त को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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