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स्वदेशी वीईजीए प्रोसेसर से बनी ‘विहान’ चिप ने सिलिकॉन निर्माण में हासिल की पहली सफलता

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 116

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। डीएलआई (Design Linked Incentive) योजना से समर्थित चेन्नई स्थित फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स ने अपने ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग चिप ‘विहान’ के सिलिकॉन निर्माण के पहले चरण में सफलता हासिल की है।

विहान को फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क के लिए विकसित किया गया है और इसमें स्वदेशी वीईजीए माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी अब 2027 में इसके उत्पादन के लिए अंतिम टेप-आउट की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारतीय घरों तक फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाने पर जोर
अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग और सुरक्षा से जुड़े चिप्स डिजाइन करने वाली भारतीय कंपनी है। कंपनी का लक्ष्य भारत में तेजी से बढ़ रहे ऑप्टिकल फाइबर और ब्रॉडबैंड नेटवर्क के लिए स्वदेशी सेमीकंडक्टर समाधान उपलब्ध कराना है।

भारत में फाइबर ब्रॉडबैंड, 5जी और डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने के साथ नेटवर्किंग उपकरणों में घरेलू स्तर पर विकसित चिप्स की मांग भी बढ़ रही है। ‘विहान’ इसी जरूरत को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) है।

निवेशकों का बढ़ा भरोसा
अहीसा ने इस साल की शुरुआत में तमिलनाडु इमर्जिंग सेक्टर सीड फंड और अन्य निजी निवेशकों के माध्यम से तमिलनाडु इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन (TNIFMC) से करीब 40 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई। इस पूंजी का इस्तेमाल उत्पाद विकास में तेजी लाने और कंपनी के सेमीकंडक्टर कारोबार को विस्तार देने में किया जा रहा है।

कंपनी को डीएलआई योजना के तहत मिली सहायता के साथ लगातार हो रही फंडिंग भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को भी दर्शाती है।

डीएलआई योजना से भारतीय चिप डिजाइन को बढ़ावा
सरकार की Design Linked Incentive (DLI) योजना का उद्देश्य भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को रणनीतिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए चिप डिजाइन करने में मदद करना है। इसके तहत सैटेलाइट संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरा, रक्षा और एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, IoT, एआई, दूरसंचार और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्रों के लिए चिप डिजाइन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार के अनुसार, डीएलआई योजना के तहत समर्थित कंपनियां अब तक 30 से अधिक चिप डिजाइन टेप-आउट हासिल कर चुकी हैं और 100 मिलियन डॉलर से अधिक की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटा चुकी हैं।

इसके अलावा, सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रमों के तहत 455 संगठनों को अत्याधुनिक चिप डिजाइन उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 350 शैक्षणिक संस्थान और 105 स्टार्टअप शामिल हैं।

अन्य भारतीय चिप स्टार्टअप भी आगे बढ़े
डीएलआई योजना के तहत हाल के महीनों में कई अन्य कंपनियों ने भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स ने स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर आधारित मोटर कंट्रोलर चिप के सिलिकॉन निर्माण के पहले चरण में सफलता हासिल की है। नेट्रासेमी ने 12 नैनोमीटर विजन SoC का परीक्षण किया है, जबकि ऑप्टोएमएल ने 12 नैनोमीटर कंप्यूट-इन-मेमोरी SoC हासिल किया है।

माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज ने अपने विजन SoC के लिए प्रामा इंडिया के साथ साझेदारी की है। वहीं, इंडीसेमी ने अपने Bluetooth LE 6 चिप मॉड्यूल के लिए वैश्विक प्रमाणन हासिल किया है।

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर सरकार का जोर
भारत का लक्ष्य केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं है। सरकार चिप डिजाइन और निर्माण से लेकर उन्नत पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान एवं विकास और कुशल मानव संसाधन तक पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने पर काम कर रही है।

जुलाई 2026 में स्वीकृत सेमीकंडक्टर 2.0 के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।

अहीसा की ‘विहान’ चिप की सिलिकॉन सफलता इस दिशा में एक और कदम है। इससे संकेत मिलता है कि भारत में विकसित चिप डिजाइन अब प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक सिलिकॉन निर्माण, परीक्षण और संभावित बड़े पैमाने के उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने के साथ भारत की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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