15 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले से 75 मिनट का स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। यह पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण रहा। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका चौथा सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन है।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मोदी ने लाल किले से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। पिछले वर्ष 2025 में उनका भाषण 103 मिनट का था, जो 2024 के 98 मिनट के रिकॉर्ड से भी लंबा था।
2014 के बाद भाषण की अवधि
मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि अलग-अलग वर्षों में काफी बदलती रही है। 2014 में उनका पहला भाषण 65 मिनट का था। इसके बाद 2015 में 88 मिनट, 2016 में 96 मिनट और 2017 में 56 मिनट का भाषण हुआ, जो उनका अब तक का सबसे छोटा संबोधन था।
2018 में उन्होंने 83 मिनट, 2019 में करीब 92 मिनट और 2020 में 90 मिनट तक भाषण दिया। 2021 में उनका संबोधन 88 मिनट और 2022 में 74 मिनट का था। 2023 में भाषण 90 मिनट का रहा। इसके बाद 2024 में 98 मिनट और 2025 में 103 मिनट के साथ उन्होंने लगातार दो नए रिकॉर्ड बनाए।
लाल किले से 13वां लगातार भाषण
मोदी का शनिवार का संबोधन लाल किले से लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण था। 2025 में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 12 स्वतंत्रता दिवस भाषणों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था।
अब मोदी इस मामले में सिर्फ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं। नेहरू ने लाल किले से लगातार 17 बार स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित किया था।
नेहरू और गुजराल के लंबे भाषण
मोदी से पहले लाल किले से सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषण देने वालों में जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल शामिल रहे हैं। नेहरू का 1947 का भाषण 72 मिनट और गुजराल का 1997 का भाषण 71 मिनट का था।
वहीं, सबसे छोटे भाषणों में नेहरू और इंदिरा गांधी के संबोधन शामिल हैं। नेहरू ने 1954 में और इंदिरा गांधी ने 1966 में सिर्फ 14 मिनट का भाषण दिया था।
वाजपेयी और मनमोहन सिंह के छोटे संबोधन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कुछ स्वतंत्रता दिवस भाषण भी अपेक्षाकृत छोटे रहे। मनमोहन सिंह ने 2012 में 32 मिनट और 2013 में 35 मिनट का भाषण दिया था। वाजपेयी के 2002 और 2003 के भाषण क्रमशः 25 और 30 मिनट के थे।
स्वतंत्रता दिवस भाषण की अवधि अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल और उस समय की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार बदलती रही है।















