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बीमारी की सही पहचान से लेकर बेहतर इलाज तक सब कुछ: इंदौर में होने जा रही देश की प्रमुख डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस- काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 114

- मध्य प्रदेश में पहली बार इस तरह का आयोजन
- डायग्नोस्टिक पेशेवरों और मरीजों दोनों के लिए ज्ञान और सुधार का अवसर
- कॉन्फ्रेंस के लिए सम्पूर्ण भारत से 1600 लोगों ने किया रजिस्ट्रेशन
- यह कॉन्फ्रेंस डायग्नोस्टिक के सभी विंग्स के लिए है, जो इसमें शामिल होकर बहुत कुछ सीख सकते हैं

इंदौर 23 जनवरी 2026। मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों के संघ (काहो/सीएएचओ) की प्रमुख डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस- काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026, लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह (डीएवीवी), इंदौर, मध्य प्रदेश में 24 और 25 जनवरी, 2026 को आयोजित होने जा रही है। यह राष्ट्रीय स्तर का आयोजन देश में स्वास्थ्य जाँच और डायग्नोस्टिक्स की गुणवत्ता, सुरक्षा और नई तकनीकों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा। अपने पाँचवें संस्करण में यह कॉन्फ्रेंस इस बात पर जोर देती है कि आज की हेल्थकेयर व्यवस्था में डायग्नोस्टिक्स की भूमिका कितनी अहम् है, क्योंकि करीब 70 प्रतिशत मेडिकल फैसले जाँच रिपोर्ट पर आधारित होते हैं। बढ़ते रोग मामलों, नई बीमारियों के सामने आने और समय पर सही इलाज की जरूरत को देखते हुए, बेहतर स्वास्थ्य परिणाम और सभी तक समान स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए मजबूत डायग्नोस्टिक सिस्टम बेहद जरूरी हो गया है।

मध्य प्रदेश में इस तरह का आयोजन पहली बार होने जा रहा है, जिसमें हेल्थ डायग्नोस्टिक में पेशेंट सेफ्टी पर ज़ोर दिया गया है। काहो एनजीओ इंदौर में पहली बार इस तरह की कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। हॉस्पिटल्स में पेशेंट्स के लिए जो सेफ्टी मेज़र्स अपनाने चाहिए, उसके लिए यह एनजीओ प्रशिक्षण प्रदान करता है, वह भी पूरी तरह निःशुल्क, ताकि मरीज़ों के लिए सुरक्षित देखभाल बनी रहे। काहो यह आश्वासन देता है कि हर अस्पताल में डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी की ट्रेनिंग निःशुल्क प्रदान की जाएगी। इस आयोजन के लिए सम्पूर्ण भारत से 1600 रजिस्ट्रेशंस प्राप्त हुए। यह कॉन्फ्रेंस डायग्नोस्टिक के सभी विंग्स के लिए है, ऐसे में सभी इसमें शामिल होकर बहुत कुछ सीख सकते हैं।

डॉ. विनीता कोठारी, सेक्रेटरी, डायग्नोस्टिक डिवीज़न, कंसोर्शियम ऑफ एक्रेडिटेड हैल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशंस; डॉ. डी पी लोकवानी, फाउंडर वाइस चांसलर, एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी डायरेक्टर, सुख सागर मेडिकल कॉलेज जबलपुर; और डॉ. अपर्णा जयराम, चेयरमैन, डायग्नोस्टिक डिवीज़न, कंसोर्शियम ऑफ एक्रेडिटेड हैल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशंस, ने कॉन्फ्रेंस में उपस्थित होकर मीडिया को सम्बोधित किया।

यह कॉन्फ्रेंस मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों के संघ (काहो) के डायग्नोस्टिक्स डिवीजन द्वारा आयोजित की जा रही है। काहो एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, जो देशभर के अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटर्स और क्वालिटी प्रोफेशनल्स के साथ मिलकर काम करता है। संगठन ट्रेनिंग प्रोग्राम, क्षमता बढ़ाने की पहल और बेहतर कार्यप्रणालियों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता को मजबूत करता रहा है। सुरक्षा, मानकीकरण और लगातार सुधार पर ध्यान देते हुए, खासकर जमीनी और संस्थागत स्तर पर काहो भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था को बेहतर बनाने और उसे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने में अहम् भूमिका निभा रहा है।

काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का थीम 'नैदानिक उत्कृष्टता के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को सशक्त बनाना' भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं, जैसे- आयुष्मान भारत, यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, डिजिटल हेल्थ मिशन और आत्मनिर्भर भारत की सोच से जुड़ा है। यह कॉन्फ्रेंस इस बात पर जोर देती है कि सही और समय पर जाँच कैसे मेडिकल फैसलों को बेहतर बनाती है, बीमारी की रोकथाम में मदद करती है और हर नागरिक तक बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में अहम् भूमिका निभाती है।

1,500 से अधिक हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक प्रोफेशनल्स, 100 से ज्यादा एक्सपर्ट फैकल्टी और स्पीकर्स तथा 70 से अधिक इंडस्ट्री एग्ज़िबिटर्स और पार्टनर्स की मौजूदगी के साथ काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 एक बड़ा राष्ट्रीय मंच बनकर उभरेगा। यह कॉन्फ्रेंस ज्ञान साझा करने, अनुभवों से सीखने और आपसी सहयोग को मजबूत करने का अवसर देती है। इसमें लैब मेडिसिन एक्सपर्ट्स, रेडियोलॉजिस्ट, मॉलीक्यूलर डायग्नोस्टिक्स विशेषज्ञ, पॉलिसी मेकर्स, रेगुलेटर्स, शिक्षाविद और इंडस्ट्री लीडर्स एक साथ आकर नई तकनीकों पर चर्चा करते हैं और डायग्नोस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों के समाधान तलाशते हैं।

काहो डायग्नोस्टिकॉन की एक खास पहचान इसका क्वालिटी, पेशेंट सेफ्टी और मान्यता पर मजबूत फोकस है। देशभर के हजारों डायग्नोस्टिक सेंटर्स और हेल्थकेयर संस्थानों के अनुभवों के आधार पर यह कॉन्फ्रेंस बेहतर कामकाज, ऑपरेशनल एफिशिएंसी, स्टाफ की दक्षता और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी अच्छी प्रैक्टिसेस को आगे बढ़ाती है। यह पहल खासतौर पर दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत करने में मदद करती है, ताकि पूरे देश में एक समान और भरोसेमंद जाँच सुविधाएँ लोगों तक पहुँच सकें।

यह आयोजन मेगा डायग्नोस्टिक एक्सपो, प्रैक्टिकल प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप्स और देश के प्रमुख अस्पतालों में होने वाले लाइव टेक्नोलॉजी डेमो के जरिए नवाचार और इंडस्ट्री ग्रोथ को बढ़ावा देगा। इन पहलों के माध्यम से नई और एडवांस्ड जाँच तकनीकों को सामने लाया जाता है, देश में हो रहे रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहन मिलता है, मेडटेक और डायग्नोस्टिक्स स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिलता है और भारत को किफायती व उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सॉल्यूशंस का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में काम किया जाता है।

वर्ष 2021 में अपनी स्थापना के बाद से हैदराबाद, कोलकाता और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सफल आयोजन कर चुकी काहो डायग्नोस्टिकॉन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, इंदौर में होने वाला डायग्नोस्टिकॉन 2026 का पाँचवाँ संस्करण अपने स्तर, प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व के लिहाज से एक अहम् पड़ाव माना जा रहा है। भारत के प्रमुख हेल्थकेयर क्वालिटी कॉन्फ्रेंस काहोकॉन से ठीक पहले आयोजित यह कॉन्फ्रेंस, डायग्नोस्टिक्स, क्वालिटी, सेफ्टी और हेल्थकेयर मैनेजमेंट को एक साथ जोड़कर बेहतर और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली बनाने के काहो के समग्र नजरिए को दर्शाती है।

मध्य प्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, लोकसभा के माननीय सांसद शंकर लालवानी, एनएबीएल के डॉ. संदीप शाह, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघाई और अमलतास मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अध्यक्ष श्री मयंकराज भदोरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनकी उपस्थिति निदान और स्वास्थ्य सेवा समुदाय के लिए प्रेरणादायक होगी और सरकार की गुणवत्तापूर्ण, टेक्नोलॉजी-आधारित और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी।

इस तरह, काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 सिर्फ एक पेशेवर कॉन्फ्रेंस नहीं है, बल्कि यह भारत में स्वास्थ्य निदान के भविष्य को आकार देने और एक समावेशी, सुदृढ़ और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय पहल के रूप में उभर रही है।

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