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98% तक सफलता का दावा, आयुष्मान योजना में मुफ्त मिलेगा थ्रोम्बेक्टॉमी इलाज

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prativad
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📍 भोपाल
98% तक सफलता का दावा, आयुष्मान योजना में मुफ्त मिलेगा थ्रोम्बेक्टॉमी इलाज
छोटी सुई से थक्का हटेगा, बिना बड़ी सर्जरी और बेहोशी के इलाज संभव

21 फरवरी 2026। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाते हुए Noble Multi Speciality Hospital ने उन्नत रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी सुविधा की शुरुआत की है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक यह तकनीक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली बार उपलब्ध कराई गई है, जो जटिल रक्त थक्कों के इलाज में नई दिशा देगी।

प्रेस वार्ता में चीफ इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट Dr. Agamya Saxena (MD, EBIR) और अस्पताल के डायरेक्टर एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ Dr. Sarvesh Mishra (MBBS, MD) ने बताया कि यह तकनीक फार्मोकोमैकेनिकल पद्धति पर आधारित है। इसमें दवा और मैकेनिकल प्रक्रिया के संयोजन से थक्का हटाया जाता है और प्रभावित हिस्से में रक्त प्रवाह तेजी से बहाल किया जाता है।

डॉ. सक्सेना के अनुसार हाथ, पैर, पेट, डायलिसिस फिस्टुला सहित शरीर के कई हिस्सों में बने थक्कों को बिना बड़े चीरे के हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में केवल एक छोटी सुई के जरिए धमनी के रास्ते प्रभावित स्थान तक पहुंचकर थक्का निकाला जाता है। मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे जोखिम और रिकवरी समय दोनों कम होते हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि नई स्ट्रोक गाइडलाइंस 2026 के तहत त्वरित थ्रोम्बेक्टॉमी को प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि समय पर हस्तक्षेप से लकवे की संभावना काफी घटाई जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, सूजन, तेज दर्द, त्वचा का रंग बदलना, बोलने में दिक्कत या किसी हिस्से में सुन्नता जैसे लक्षण दिखें तो देरी न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।

अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इस तकनीक की सफलता दर 98 से 100 प्रतिशत तक रही है। उपचार आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और धूम्रपान से दूरी रखकर रक्त थक्कों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

अब तक डॉ. अगम्य सक्सेना इस तकनीक से 125 से अधिक जटिल मामलों में सफल उपचार कर चुके हैं। पहले उपकरण किराये पर उपलब्ध होने के कारण समय निर्धारण में दिक्कत आती थी। अब स्थायी रूप से मशीन स्थापित होने के बाद यह सुविधा 24x7 उपलब्ध रहेगी, जिससे आपात स्थिति में तुरंत उपचार संभव होगा।

प्रेस वार्ता में लाभान्वित मरीज आकाश (परिवर्तित नाम) ने बताया कि समय पर की गई प्रक्रिया ने उनका पैर कटने से बचा लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा के शुरू होने से प्रदेश के मरीजों को महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। समय और खर्च दोनों की बचत होगी, और गंभीर मामलों में उपचार की रफ्तार ही जीवन बचाने का काम करेगी।
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