×

धिरौली कोल ब्लॉक पर विधानसभा में घमासान, मुआवजा और पुल डिजाइन पर भी तीखी बहस

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 121

26 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक का मुद्दा अचानक केंद्र में आ गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोल ब्लॉक के लिए आठ गांवों की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार इससे प्रभावित हैं।

सिंघार का आरोप था कि कई आदिवासी परिवारों को पूर्ण मुआवजा नहीं मिला, जबकि भुगतान में अनियमितताओं के उदाहरण सामने आए हैं। उन्होंने सदन में नाम लेते हुए कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख रुपये से अधिक और यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर करीब 14 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। सिंघार ने सवाल उठाया कि जब स्थानीय प्रभावित परिवारों को उनका हक नहीं मिल पा रहा, तो बाहरी लोगों को भुगतान किस आधार पर हुआ।

JPC जांच और काम रोकने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की जांच के लिए विधानसभा की संयुक्त समिति से जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती और सभी प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक कोल ब्लॉक का काम तत्काल रोका जाए।

सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल जब क्षेत्र के दौरे पर गया, तो उसे रोक दिया गया और हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई के वीडियो प्रमाण भी मौजूद हैं।

सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया। कुछ समय के लिए सदन में तीखी नोकझोंक का माहौल बना रहा। धिरौली कोल ब्लॉक को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है।

भोपाल का ‘90 डिग्री’ पुल बना बहस का मुद्दा
इसी दौरान भोपाल में बने कथित 90 डिग्री टर्न वाले पुल पर भी चर्चा छिड़ गई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने पुल की डिजाइन, सुरक्षा और मानकों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यह पुल देश-विदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

PWD मंत्री राकेश सिंह ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पुल का एंगल 90 नहीं बल्कि 119 डिग्री है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में भी ऐसे डिजाइन मौजूद हैं और यह कोई असामान्य बात नहीं है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि पुल का निर्धारित स्लोप और कर्व वैसा विकसित नहीं हो पाया जैसा योजना में था, लेकिन स्ट्रक्चर में किसी तरह की तकनीकी खामी नहीं है।

मंत्री ने बताया कि एक विशेष रोड सर्वे अभियान के तहत ऐप आधारित निरीक्षण किया गया। तीन दिन और बाद में सात दिन चले इस अभियान में 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 2,975 भवनों और 1,426 पुलों का निरीक्षण किया गया। पिछले 13 महीनों में 875 निर्माण कार्यों की रैंडम समीक्षा की गई। इसके परिणामस्वरूप चार इंजीनियर निलंबित किए गए, 105 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए, 25 ठेकेदार और एक कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट किया गया और 329 निर्माण कार्यों में सुधार कराया गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सड़कों पर गड्ढों की पहचान के लिए सैटेलाइट सर्विस के उपयोग का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि इससे गड्ढों की सटीक गहराई और माप का पता लगाया जा सकेगा।

बजट के आकार पर भी तर्क-वितर्क
विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने सरकारों का मूल्यांकन केवल बजट के आकार से करने के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय में बजट का आकार स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय बजट करीब 23 हजार करोड़ रुपये था, सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में यह लगभग 10 हजार करोड़ और 2007-08 में शिवराज सिंह चौहान के दौर में यह 40 हजार करोड़ तक पहुंच गया था।

Related News

Global News