27 अप्रैल 2026। भोपाल में सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र हंगामेदार रहा। ‘नारी शक्ति वंदन’ विषय पर बुलाए गए इस सत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा होनी थी, लेकिन शुरुआत से ही बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव तेज हो गया।
कांग्रेस का वॉकआउट, सदन के बाहर नारेबाजी
परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने के सरकारी संकल्प पर चर्चा के दौरान कांग्रेस ने मौजूदा परिसीमन के आधार पर आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा। इस पर चर्चा नहीं होने से नाराज होकर कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया और बाहर जमकर नारेबाजी की।
कांग्रेस के इस कदम पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और जनता आने वाले समय में उसे सबक सिखाएगी।
ट्रैक्टर रोका गया, गेहूं का गट्ठा लेकर पहुंचे विधायक
कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली से विधानसभा पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मंत्रालय के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। ट्रैक्टर को लेकर पुलिस और विधायक के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई।
इसके बाद शाह गेहूं का गट्ठा लेकर विधानसभा पहुंचे, हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने उसे अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी।
अभिजीत शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में किसानों को गेहूं का उचित दाम नहीं मिल रहा और उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है ताकि व्यापारियों को फायदा मिले।
मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि इतने अहम मुद्दे पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तुरंत महिला आरक्षण लागू करने के पक्ष में है, लेकिन बीजेपी परिसीमन के नाम पर मामला उलझा रही है।
वहीं, कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने भी मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सदन में उपमुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री मौजूद हैं, जबकि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि मुख्यमंत्री अपने कार्यालय से कार्यवाही पर नजर रख रहे हैं।
बीजेपी का पलटवार
राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने महिला आरक्षण के संकल्प का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कदम महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए है। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने अपने रवैये से महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है।
सत्र की उपयोगिता पर भी उठे सवाल
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने इस विशेष सत्र की जरूरत पर ही सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जब संबंधित विधेयक संसद में पास नहीं हो पाया, तो यहां इस पर चर्चा का औचित्य क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जरूरत है, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही।
कुल मिलाकर, महिला सशक्तिकरण जैसे गंभीर मुद्दे पर बुलाया गया यह विशेष सत्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया।















