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बजट सत्र में 7 विधेयक पेश होने की तैयारी, ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे दुकान खोलने का प्रस्ताव

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📍 भोपाल
बजट सत्र में 7 विधेयक पेश होने की तैयारी, ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे दुकान खोलने का प्रस्ताव
14 फरवरी 2026। राज्य विधानसभा के आगामी बजट सत्र में विभिन्न विभागों से जुड़े कम से कम सात विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें तीन विधेयक श्रम विभाग, दो विधि विभाग और दो वित्त विभाग से संबंधित बताए जा रहे हैं। इसके अलावा विधायकों के वेतन एवं भत्तों से जुड़ा विधेयक भी सत्र के दौरान आ सकता है।

श्रम विभाग के प्रस्ताव
श्रम विभाग के सूत्रों के अनुसार तीन विधेयक अंतिम चरण में हैं। इनमें एक प्रस्ताव मध्यप्रदेश स्लेट एवं पेंसिल कर्मकार अधिनियम को निरस्त करने से जुड़ा है। कभी राज्य में स्लेट और पेंसिल उद्योग बड़े पैमाने पर संचालित होते थे, लेकिन समय के साथ इनका उपयोग लगभग समाप्त हो गया है। उद्योगों की संख्या घटने के कारण संबंधित कर्मकार बोर्ड की उपयोगिता भी कम हो गई है। प्रस्ताव है कि इस बोर्ड को समाप्त कर उसे श्रम कल्याण बोर्ड में विलय कर दिया जाए।

दूसरा अहम प्रस्ताव दुकानों एवं स्थापना अधिनियम में संशोधन से संबंधित है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24 घंटे संचालित करने की अनुमति देने का प्रावधान किया जाएगा। यह व्यवस्था पहले शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी। सरकार का तर्क है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

प्रस्तावित संशोधन में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि यदि कर्मचारी रात्रि पाली में कार्य करते हैं तो उनकी सुरक्षा, परिवहन और प्रोत्साहन राशि सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही रात के समय दुकानों के संचालन के लिए कुछ निर्धारित शर्तें लागू होंगी।

वित्त विभाग के विधेयक
वित्त विभाग बजट से जुड़े दो अहम विधेयक पेश करेगा। इनमें विनियोग विधेयक और अनुपूरक बजट विधेयक शामिल हैं, जो वित्तीय प्रावधानों को विधिक स्वीकृति प्रदान करेंगे।

विधायकों के वेतन पर भी हो सकता है निर्णय
विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों के वेतन और भत्तों में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है। वर्तमान विधायकों के वेतन और पूर्व विधायकों की पेंशन की समीक्षा के लिए गठित समिति अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है। यदि सहमति बनती है, तो संबंधित संशोधन विधेयक सत्र में किसी भी समय पेश किया जा सकता है।

आगामी बजट सत्र को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें श्रम सुधारों से लेकर वित्तीय प्रावधानों और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुद्दों तक कई अहम प्रस्ताव सामने आ सकते हैं।
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