20 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। विपक्ष ने इसे गंभीर मानते हुए स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार करने पर ही सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए और सदन का माहौल गरमा गया।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पक्ष
नगर प्रशासन मंत्री Kailash Vijayvargiya ने घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद पार्षद मौके पर पहुंचे, टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। उनके मुताबिक यह इंदौर के लिए एक कलंक की तरह है।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन 22 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। मृतकों की संख्या को लेकर जांच जारी है। मंत्री ने आरोप लगाया कि इस मामले का राजनीतिकरण किया गया, जबकि सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रही है।
नेता प्रतिपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने कहा कि सरकार चर्चा से बच रही है। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उन्हें जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने इसे केवल हादसा नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की मौत बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को बचाया गया और दलित व आदिवासी अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। यदि मंत्री गलती स्वीकार कर रहे हैं तो उन्हें पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने पानी की खराब स्थिति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बावजूद ठोस कदम न उठाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस विधायकों के सवाल
कांग्रेस विधायक Jaivardhan Singh ने कहा कि इंदौर को कई बार देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने उस छवि को धक्का पहुंचाया। जब सम्मान लेने की बात आती है तो मंत्री और महापौर आगे रहते हैं, तो जिम्मेदारी लेने से पीछे क्यों हटते हैं। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े आने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
लखन गंगोरिया और सचिन यादव ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर नहीं, पूरे प्रदेश का मुद्दा है। छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई और बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया गया। उन्होंने स्थगन प्रस्ताव पर खुली चर्चा की मांग की।
अध्यक्ष का फैसला और हंगामा
अध्यक्ष ने बताया कि मामले की जांच के लिए न्यायालय द्वारा आयोग गठित किया जा चुका है और वह काम कर रहा है। नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई।
इस पर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या स्वच्छ पानी, मुआवजा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट जैसे मुद्दों पर सदन में बात भी नहीं होगी। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी जब चर्चा की अनुमति नहीं मिली तो कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।














