🔴 TRENDING NOW!
युद्ध की तैयारी: ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए वैश्विक निगरानी अभियान चलाने का आरोप, जांच में इजरायली कंपनी का नाम भारत स्वस्तिक यात्रा की कुरुक्षेत्र में रामकथा में भगवद्गीता के शाश्वत ज्ञान का स्मरण ग्वालियर हादसा: सीएम डॉ. मोहन यादव एक्शन में, सीएसपी को हटाया, 8 को किया सस्पेंड भोपाल की काली बाड़ी में दुर्गा पूजा का 70वां वर्ष, सुनहरी प्रतिमा और प्रकृति थीम बनी आकर्षण इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव-2026: सीएम डॉ. मोहन का फोकस शहरों के भविष्य पर, जानें कैसे बदलेगी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की तस्वीर राज्य सरकार ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत में Tesla Roadster की बुकिंग शुरू, ₹5.01 लाख से करना होगा भुगतान, जानें पूरी कीमत बिजनेस मीटिंग से ग्लोबल समिट तक, MICE पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश भारत स्वस्तिक यात्रा का झाँसी पड़ाव: मोरारी बापू ने कहा, स्वस्तिक का केंद्र बिंदु परब्रह्म परमात्मा हैं, जिनका नाम राम है पासवर्ड था ‘123456’, खतरे में पड़ गई 88 लाख लोगों की पहचान!

नई कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइन: फिश ऑयल सप्लीमेंट्स पर सवाल, क्या सच में बेकार हैं ये?

👤
prativad
👁 1861 व्यूज
📍 भोपाल
नई कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइन: फिश ऑयल सप्लीमेंट्स पर सवाल, क्या सच में बेकार हैं ये?
13 अप्रैल 2026। कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों से बचाव के लिए लोग अक्सर फिश ऑयल और दूसरे सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं। लेकिन अब नई गाइडलाइंस ने इस ट्रेंड पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के लिए जाने वाले सप्लीमेंट्स न सिर्फ बेअसर हो सकते हैं, बल्कि कई मामलों में नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

फिश ऑयल: फायदेमंद, लेकिन हर किसी के लिए नहीं
फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड (EPA और DHA) को लंबे समय से दिल और दिमाग के लिए अच्छा माना जाता है। ये शरीर में सूजन कम करने, खून के थक्कों को संतुलित करने और ब्लड वेसल्स को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

हालांकि, ये बात भी साफ है कि ओमेगा-3 मुख्य रूप से ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है, लेकिन LDL यानी ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’ पर इसका असर बहुत सीमित होता है। इसलिए इसे स्टैटिन जैसी दवाओं का विकल्प नहीं माना जा सकता।

नई गाइडलाइन क्या कहती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोलेस्ट्रॉल कम करने या हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को घटाने के लिए ओवर-द-काउंटर फिश ऑयल सप्लीमेंट्स लेना “समय और पैसे की बर्बादी” हो सकता है।

रिसर्च में पाया गया है कि ये सप्लीमेंट्स कोलेस्ट्रॉल को प्रभावी तरीके से कम नहीं करते, जबकि स्टैटिन जैसी दवाएं इस मामले में कहीं ज्यादा असरदार साबित हुई हैं।

ज्यादा फिश ऑयल से बढ़ सकता है खतरा
कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि अधिक मात्रा में फिश ऑयल लेने से LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसके अलावा, अनियमित दिल की धड़कन (AFib) का जोखिम भी बढ़ सकता है।

ताजा शोध के अनुसार, जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी नहीं है, उनमें भी नियमित फिश ऑयल सेवन से AFib का खतरा करीब 13% तक बढ़ सकता है।

सबसे बड़ा खतरा: झूठा भरोसा
डॉक्टरों का मानना है कि सप्लीमेंट्स का सबसे बड़ा नुकसान उनका “फॉल्स सेंस ऑफ सिक्योरिटी” है। लोग इन्हें प्राकृतिक और सुरक्षित समझकर असली इलाज, जैसे स्टैटिन या लाइफस्टाइल बदलाव, को टाल देते हैं।

इस देरी के दौरान शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ता रहता है, जिससे भविष्य में हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

कब जरूरी हो सकता है फिश ऑयल?
यह गाइडलाइन पूरी तरह फिश ऑयल के खिलाफ नहीं है। डॉक्टर की सलाह पर दिए जाने वाले हाई-डोज प्रिस्क्रिप्शन ओमेगा-3 (जैसे शुद्ध EPA) कुछ हाई-रिस्क मरीजों में फायदेमंद हो सकते हैं।

ये दवाएं स्टैटिन के साथ मिलकर काम करती हैं और खास मेडिकल कंडीशन्स में उपयोग की जाती हैं।

सप्लीमेंट्स बनाम दवाएं: बड़ा फर्क
ओवर-द-काउंटर सप्लीमेंट्स की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनकी गुणवत्ता और असर की जांच उतनी सख्ती से नहीं होती जितनी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की होती है।

कई बार इनमें जरूरी तत्व (जैसे EPA) की मात्रा बहुत कम होती है, और असर पाने के लिए रोजाना कई टैबलेट्स लेनी पड़ सकती हैं। साथ ही, इनमें मिलावट या अशुद्धियां होने का भी खतरा रहता है।

ओमेगा-3 का बेहतर और सुरक्षित स्रोत

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ओमेगा-3 पाने के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को अपनाना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी है।

इसके अच्छे स्रोत हैं:

मछली (विशेष रूप से फैटी फिश)
ऑलिव ऑयल
अलसी (फ्लैक्ससीड)
चिया सीड्स
अखरोट
सोयाबीन
हरी पत्तेदार सब्जियां
सीधी बात

दिल की सेहत के लिए “एक गोली” वाला आसान रास्ता अक्सर काम नहीं करता। सही इलाज, संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज ही सबसे भरोसेमंद तरीका है। सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, वरना फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। किसी भी दवा या सप्लीमेंट को शुरू या बंद करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Tags :