26 अप्रैल 2026। भोपाल में आयोजित ‘Big Update 2026 InfECON’ कार्यक्रम में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स ने संक्रमण से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे और गलत निदान की समस्या पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बीमारियों के लक्षण एक जैसे दिखने के कारण सही बीमारी पहचानना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, जिससे मरीजों को गलत उपचार मिलने का जोखिम बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कोलांगाइटिस, H. pylori संक्रमण, लिवर फोड़ा और हेपेटाइटिस B जैसे जटिल विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान जटिल केस स्टडीज़, नए क्लिनिकल गाइडलाइंस और प्रभावी उपचार पद्धतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
डॉक्टरों ने साफ कहा कि संक्रमण और सूजन के लक्षण अक्सर एक जैसे होते हैं, इसलिए केवल सतही जांच के आधार पर इलाज करना खतरनाक हो सकता है। सटीक जांच और क्लिनिकल अनुभव का संतुलन ही सही निदान की कुंजी है।
विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे बैक्टीरिया तेजी से दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बनते जा रहे हैं, जो आने वाले समय में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
कार्यक्रम का आयोजन ‘भोपाल इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी’ और ‘गैस्ट्रोकेयर मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल’ द्वारा किया गया था।
हैदराबाद के डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा, “गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। इसके पीछे दूषित भोजन, असुरक्षित पानी, खराब स्वच्छता और एंटीबायोटिक का गलत उपयोग प्रमुख कारण हैं।”















