
29 अगस्त 2025। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आने वाले निर्यात पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिका के लिए ही नुकसानदेह साबित हो सकता है। शीर्ष अर्थशास्त्री और मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के एमेरिटस प्रोफेसर रिचर्ड वोल्फ का कहना है कि यह कदम भारत को ब्रिक्स देशों के और करीब धकेल सकता है।
वोल्फ ने आरटी के एक कार्यक्रम में कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति भारत जैसे देश के साथ उल्टा असर दिखा सकती है, जिसका रूस के साथ ऐतिहासिक और गहरे संबंध हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका भारतीय निर्यात के रास्ते बंद करता है तो नई दिल्ली अन्य बाजारों—खासतौर पर ब्रिक्स सदस्य देशों—की ओर रुख करेगी।
ट्रंप के टैरिफ की पृष्ठभूमि
अगस्त की शुरुआत में अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता नहीं हो सका।
27 अगस्त से ट्रंप ने अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की, यह कहते हुए कि भारत की रूस से तेल और हथियार खरीदने की नीति यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है।
"अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी"
वोल्फ ने कहा, “भारत जैसे देश पर टैरिफ की धमकियाँ देना अमेरिका के लिए खतरनाक है। यह ऐसा है मानो आप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हों।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप की रणनीति अनजाने में ब्रिक्स को पश्चिम के आर्थिक विकल्प के रूप में और मजबूत बना सकती है।
ब्रिक्स बनाम जी7
ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन ने की थी, बाद में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ। आज यह समूह जी7 से आगे निकलते हुए वैश्विक जीडीपी में बड़ा हिस्सा रखता है। हाल ही में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने भी संकेत दिया था कि वे वाशिंगटन के व्यापार दबाव का संयुक्त जवाब देने के लिए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बुलाने का प्रस्ताव रखेंगे।