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अधिकार और कर्तव्य दोनों के संतुलन से मजबूत होता है लोकतंत्र -विधानसभा अध्यक्ष

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 136

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद रखें, अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं युवा- नरेंद्र सिंह तोमर

भोपाल 8 जुलाई 2026। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और प्रत्येक भारतीय के लिए यह गर्व का विषय है। श्री तोमर ने कहा कि लोकतंत्र केवल संविधान, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, भौगोलिक सीमाओं अथवा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह उदगार आज विधानसभा के मानसरोवर सभागार में यंग इंडियंस पार्लियामेंट 2026 के कार्यक्रम के समापन सत्र के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का गंभीर अध्ययन करें, ताकि लोकतंत्र के मूल्यों को समझते हुए उसका सही उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्त करना जितना महत्वपूर्ण था, उससे कहीं अधिक आवश्यक आज लोकतंत्र को सशक्त, स्थायी एवं आदर्श बनाना है, जिससे भारत विश्व के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों का अनुकरणीय उदाहरण बन सके।

अपने संबोधन में श्री तोमर ने अधिकार और कर्तव्य को लोकतंत्र के दो समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार प्रदान करता है, वहीं उनके कर्तव्यों का भी बोध कराता है। अधिकार और कर्तव्य दोनों के संतुलित निर्वहन से ही लोकतंत्र मजबूत होता है, जबकि किसी एक पक्ष की उपेक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकती है।

श्री तोमर ने कहा कि अधिकारों की मांग करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, किंतु उसके साथ कर्तव्यों के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। समाज, राष्ट्र और संस्थाओं के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए ही व्यक्ति स्वयं की प्रगति के साथ-साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

श्री तोमर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार या आजीविका प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील एवं संस्कारित नागरिक का निर्माण भी शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। विद्यार्थियों को पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं लोकतांत्रिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना चाहिए। नेतृत्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। प्रत्येक युवा अपने विद्यालय, समाज, कार्यक्षेत्र अथवा किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर प्रभावी नेतृत्व स्थापित कर सकता है। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ जीवन मूल्यों, कौशल विकास एवं व्यावहारिक ज्ञान से भी जोड़ने का प्रयास कर रही है।

सामाजिक मूल्यों पर बल देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक जीवन में नैतिकता, पारिवारिक संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों का महत्व कम नहीं होना चाहिए। माता-पिता, गुरु, समाज और राष्ट्र के प्रति सम्मान एवं दायित्वबोध ही एक स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करें और उत्कृष्टता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। विशेष रूप से राजनीति में आने वाले युवाओं से उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण एवं जनकल्याण होना चाहिए। सेवा के स्पष्ट दृष्टिकोण, अनुभव और प्रतिबद्धता के साथ ही लोकतांत्रिक नेतृत्व सार्थक बनता है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवा प्रतिभागियों को सकारात्मक सोच, अध्ययनशीलता, तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि देश का युवा वर्ग भारत के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, समृद्ध एवं आदर्श बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम के आरंभ में यंग इंडियंस भोपाल की चेयरपर्सन कुहू शर्मा ने आयोजित कार्यक्रम के संबंध में प्रकाश डाला कि भोपाल के 10 विद्यालयों से 150 से अधिक विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। इनमें से चयनित 20 विद्यार्थी यंग इंडियंस पार्लियामेंट के राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

इस अवसर पर भारतीय उ‌द्योग परिसंघ (CII) के स्टेट हेड सिद्धार्थ चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे।

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